Reliance Power और Reliance Infrastructure के शेयरों में धड़ाम, CBI की कार्रवाई के बाद निवेशकों में हड़कंप

Saurabh
By Saurabh

Reliance Group की दो बड़ी कंपनियों, Reliance Power और Reliance Infrastructure, के शेयर सोमवार, 25 अगस्त को बाजार खुलते ही तेज गिरावट के साथ खुले। Reliance Power का शेयर ₹46.46 पर लॉकडाउन हुआ, जो कि 5% की गिरावट दर्शाता है, वहीं Reliance Infrastructure का शेयर भी 5% के निचले सर्किट पर ₹275.65 पर फंसा रहा। इस अचानक आई गिरावट के पीछे मुख्य कारण CBI की हालिया कार्रवाई मानी जा रही है, जो Reliance Communications पर हुई है। हालांकि, दोनों कंपनियों ने रविवार को इस मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि CBI की कार्रवाई का उनके व्यवसाय, वित्तीय प्रदर्शन, शेयरधारकों या कर्मचारियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। Reliance Power और Reliance Infrastructure ने दो अलग-अलग एक्सचेंज फाइलिंग में स्पष्ट किया कि वे स्वतंत्र और अलग-अलग सूचीबद्ध कंपनियां हैं और इनका Reliance Communications से कोई वित्तीय या व्यावसायिक संबंध नहीं है। साथ ही, Anil D. Ambani तीन से ढाई वर्षों से Reliance Power के बोर्ड में नहीं हैं। इसलिए, Reliance Communications से जुड़ी किसी भी कार्रवाई का उनके प्रबंधन, संचालन या गवर्नेंस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कंपनियों ने मीडिया रिपोर्ट्स को भी स्पष्ट किया कि CBI की कार्रवाई का कारोबार या किसी अन्य हितधारक पर कोई प्रभाव नहीं है। Reliance Communications इस समय SBI के नेतृत्व में एक क्रेडिटर्स कमेटी के अधीन है, जिसका पर्यवेक्षण एक रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल करता है। इस मामले की सुनवाई NCLT, सुप्रीम कोर्ट समेत कई न्यायिक मंचों पर पिछले छह वर्षों से चल रही है और अभी भी लंबित है

इन परिस्थितियों के बावजूद, Reliance Power और Reliance Infrastructure ने अपनी बिजनेस योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करने और सभी हितधारकों के लिए मूल्य सृजन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। Reliance Infrastructure भारत की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में से एक है, जो पावर, रोड्स, मेट्रो रेल और रक्षा जैसे उच्च विकास वाले सेक्टर्स में कई विशेष प्रयोजन वाहनों (SPVs) के माध्यम से परियोजनाएं विकसित करती है। वहीं, Reliance Power देश की अग्रणी निजी क्षेत्र की पावर जनरेशन कंपनी है, जिसके पास 5,305 मेगावाट का परिचालन पोर्टफोलियो है, जिसमें Sasan Power Ltd का 3,960 मेगावाट शामिल है, जो विश्व का सबसे बड़ा एकीकृत कोयला आधारित पावर प्लांट है। हालांकि, SBI के बाद अब Bank of India ने भी Reliance Communications और Anil Ambani को धोखाधड़ीकर्ता के रूप में टैग कर दिया है। Bank of India ने अगस्त 2016 में RCom को ₹700 करोड़ का ऋण दिया था, जिसका उपयोग कंपनी के पूंजीगत और परिचालन व्यय तथा मौजूदा देनदारियों के भुगतान के लिए किया जाना था। लेकिन आधे से अधिक राशि अक्टूबर 2016 में फिक्स्ड डिपाजिट में निवेश की गई, जो कि ऋण स्वीकृति पत्र के नियमों के खिलाफ था। Bank of India ने इस मामले को धोखाधड़ी के तौर पर वर्गीकृत किया है और अपने एक पत्र में इस बात का उल्लेख किया है, जिसे RCom ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में भी प्रकट किया है। Anil Ambani के प्रवक्ता ने कहा कि Bank of India की यह कार्रवाई एक दशक पुराने मामले से संबंधित है और सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध सभी दस्तावेज़ और रिकॉर्ड के अनुसार है। उन्होंने इस मामले को पहले से जारी विवाद के हिस्से के रूप में बताया। इस घटनाक्रम ने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है, जिससे Reliance Group की कंपनियों के शेयरों में भारी बिक्री दबाव देखा गया

विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही Reliance Power और Reliance Infrastructure का RCom से कोई सीधा संबंध न हो, लेकिन समूह की छवि पर इस तरह की खबरों का असर पड़ना स्वाभाविक है। निवेशक फिलहाल सतर्क हैं और बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है। Reliance Group की इन प्रमुख कंपनियों ने अपनी प्रगति और योजनाओं को जारी रखने का भरोसा दिया है और कहा है कि वे अपने व्यवसाय को मजबूत बनाने तथा सभी स्टेकहोल्डर्स के लिए बढ़ती हुई वैल्यू क्रिएशन पर फोकस बनाए रखेंगी। वहीं, judicial प्रक्रिया अभी भी जारी है और इस पूरे मामले का निष्पादन न्यायालयों के निर्णय पर निर्भर करेगा। इस बीच, बाजार में आगामी सप्ताह में अमेरिकी और भारतीय टैरिफ डेडलॉक, Nvidia के आय परिणाम, GDP आंकड़े और ऑटो सेक्टर के शेयरों पर नजर बनी रहेगी, जो निवेशकों के मूड को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन Reliance Power और Reliance Infrastructure की स्थिति की निगरानी विशेष रूप से तब की जा रही है जब समूह की छवि और वित्तीय स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बड़े समूहों की कंपनियों के बीच संबंध और कानूनी विवादों का शेयर बाजार पर गहरा प्रभाव पड़ता है, भले ही कंपनियां कानूनी और वित्तीय रूप से स्वतंत्र हों। निवेशकों को ऐसे समय में सतर्क रहना जरूरी है, जबकि कंपनियों को अपने संचालन में पारदर्शिता बनाए रखना और स्पष्टता प्रदान करना अहम हो जाता है

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