भारत में जल्द ही Goods and Services Tax (GST) का स्वरूप काफी सरल और कम जटिल हो सकता है। वित्त मंत्रालय ने मौजूदा कई स्लैब वाली GST प्रणाली को केवल दो मुख्य दरों – 5% और 18% – में सीमित करने का प्रस्ताव रखा है। यह कदम 2017 में GST लागू होने के बाद से देश में टैक्स सुधार का सबसे बड़ा प्रयास माना जा रहा है। वर्तमान में GST में कई टैक्स स्लैब हैं, जो व्यवसायों के लिए यह समझना मुश्किल कर देते हैं कि किस उत्पाद या सेवा को किस दर पर टैक्स देना है। सरकार का मानना है कि यह जटिलता बढ़ गई है और इसे कम करना जरूरी है। इसलिए इस प्रस्ताव के तहत दैनिक उपयोग की वस्तुएं और आवश्यक वस्तुएं 5% टैक्स के अंतर्गत आएंगी, जबकि अधिकांश अन्य वस्तुएं और सेवाएं 18% के स्लैब में शामिल होंगी। वहीं, तंबाकू जैसी लक्ज़री या हानिकारक वस्तुओं पर अभी भी उच्च टैक्स दर लागू रह सकती है, और कुछ बुनियादी आवश्यकताएं टैक्स से मुक्त रह सकती हैं। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह प्रयास केवल टैक्स स्लैब को कम करने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे बड़ी योजना यह है कि टैक्स प्रणाली अधिक पारदर्शी और कार्यकुशल बने। जब टैक्स स्लैब कम होंगे, तो मूल्य निर्धारण में स्पष्टता आएगी और उपभोक्ताओं तथा कारोबार दोनों के लिए टैक्स कम्प्लायंस आसान हो जाएगा
इससे व्यवसायों को टैक्स नियमों के पालन में कम समय खर्च करना पड़ेगा और वे अपने ऑपरेशंस पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे। वित्तीय दृष्टिकोण से भी यह समय अनुकूल है क्योंकि केन्द्र सरकार ने compensation cess को धीरे-धीरे समाप्त करना शुरू कर दिया है। इससे राज्यों की GST से होने वाली आय पर निर्भरता कम होगी और वे राजस्व की कमी को लेकर कम चिंतित रहेंगे। इस वित्तीय स्थिति ने सरकार को टैक्स सुधार लागू करने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान किया है, बिना राजस्व में बड़े झटकों के। यह प्रस्ताव त्योहारों के सीजन के करीब आने के कारण भी खास महत्व रखता है। अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो यह कदम उपभोक्ताओं के बीच अच्छा प्रभाव छोड़ेगा क्योंकि वे इसे कम कीमतों और आसान बिलिंग का संकेत समझेंगे। इससे सरकार को जनता के बीच सकारात्मक धारणा बनाने में मदद मिलेगी। सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य भी स्पष्ट है। अभी के लिए दो टैक्स स्लैब प्रस्तावित हैं, लेकिन 2047 तक “One Nation, One Rate” यानी एक ही GST दर लागू करने की योजना है। यह वर्तमान प्रस्ताव उस दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है
यह व्यवस्था सरलता और राज्यों की राजस्व सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करती है। अभी यह मसौदा Group of Ministers (GoM) के पास है, और अंतिम निर्णय GST Council करेगा। लेकिन इस प्रस्ताव को लेकर सकारात्मक माहौल बन रहा है और उम्मीद है कि जल्द ही इसे लागू किया जाएगा। यह बदलाव भारत के अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में 2017 के बाद सबसे बड़ा परिवर्तन साबित हो सकता है। अगर यह दो-स्लैब प्रणाली लागू हो जाती है, तो भारत की टैक्स प्रणाली में बड़ा बदलाव आएगा। 5% और 18% के टैक्स रेट्स अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं को कवर करेंगे, जिससे व्यवसायों को टैक्स नियमों का पालन करना आसान होगा और उपभोक्ताओं को भी मूल्य निर्धारण में स्पष्टता मिलेगी। इससे भारत का टैक्स प्रशासन अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगा, जो देश की आर्थिक प्रगति में मददगार होगा