भारत के Defence Shipbuilding Sector में ₹2.12 लाख करोड़ के ऑर्डर से मची हलचल, Mazagon Dock, Cochin Shipyard और Garden Reach Shipbuilders के शेयर चमकने को तैयार

Saurabh
By Saurabh

भारत के Defence Shipbuilding सेक्टर में पिछले कुछ वर्षों से जबरदस्त विकास देखने को मिल रहा है। सरकार की देशी निर्माण (indigenous manufacturing) को बढ़ावा देने की नीति और भारी निवेश की वजह से यह क्षेत्र तेजी से उभर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में इस सेक्टर में नए ऑर्डर की मात्रा तीन गुना तक बढ़ सकती है और वित्तीय वर्ष 2027 तक ₹2.12 लाख करोड़ के बड़े ऑर्डर आ सकते हैं। इनमें सबमरीन, कोरवेट और फ्रिगेट जैसे छोटे युद्धपोतों के रिपीट ऑर्डर शामिल हैं, जो रक्षा क्षेत्र की मांग को दर्शाते हैं। इस बड़े ऑर्डर इनफ्लो से Mazagon Dock Shipbuilders, Cochin Shipyard, और Garden Reach Shipbuilders जैसी लिस्टेड PSU कंपनियों को खासा फायदा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, जून क्वार्टर की कमाई में अभी इस बढ़ोतरी का असर पूरी तरह नजर नहीं आया है। Q1FY26 में इन तीनों कंपनियों के परिणाम मिले-जुले रहे। Mazagon Dock Shipbuilders (MDL) की बात करें तो इस कंपनी ने ₹2,626 करोड़ की राजस्व रिपोर्ट की, जो पिछले साल के मुकाबले 11% अधिक है। लेकिन नेट प्रॉफिट ₹452 करोड़ रहा, जो पिछले साल की तुलना में 35% कम हुआ। इसका मुख्य कारण कुल खर्चों में 35% की बढ़ोतरी और ऑपरेटिंग मार्जिन का 27.4% से गिरकर 11.4% रह जाना बताया गया है

यह संकेत है कि लागत बढ़ने और ऑपरेशन की दक्षता में कमी के कारण लाभप्रदता प्रभावित हुई। दूसरी ओर, Cochin Shipyard ने Q1FY26 में ₹1,069 करोड़ का राजस्व दर्ज किया, जो 38% की मजबूत वृद्धि है। कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹188 करोड़ रहा, जो 8% की बढ़ोतरी दर्शाता है। CSL ने हाल ही में अमेरिकी नौसेना के साथ मास्टर शिप रिपेयर एग्रीमेंट्स किए हैं, जिससे इसके अंतरराष्ट्रीय ग्राहक आधार में विस्तार हुआ है। इसके अलावा ₹1,200 करोड़ के रक्षा रिफिट ऑर्डर और ₹250 करोड़ के टग्स के ऑर्डर ने कंपनी के ऑर्डर बुक को मजबूत किया है। इसके चलते Cochin Shipyard की स्थिति बेहतर होती दिख रही है। Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) ने तो इस तिमाही में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया है। कंपनी का राजस्व ₹1,310 करोड़ रहा, जो 29% की वृद्धि है, जबकि नेट प्रॉफिट ₹120 करोड़ रहा, जो 37% बढ़ा है। GRSE के शेयर 2025 में अब तक 60% से अधिक की तेजी दिखा चुके हैं। इस सफलता के पीछे कंपनी का मजबूत ऑर्डर बुक और नवीन तकनीकी साझेदारियां प्रमुख हैं

GRSE ने Geological Survey of India (GSI) के लिए दो Coastal Research Vessels बनाने के ऑर्डर हासिल किए हैं और भारतीय नौसेना के ₹25,000 करोड़ के Next Generation Corvettes प्रोजेक्ट में सबसे कम बोली लगाई है। इसके अलावा, कंपनी ने advanced marine gearboxes के लिए Reintjes GmbH के साथ MOU किया है, जो इसके तकनीकी विस्तार को दर्शाता है। इस पूरी तस्वीर को देखें तो सरकारी नीतियों का लाभ, मजबूत ऑर्डर विजिबिलिटी और क्षमता वृद्धि से भारत के Defence Shipbuilding PSUs का भविष्य उज्जवल नजर आता है। हालांकि, यह सेक्टर पूंजी-गहन (capital-intensive) होने के कारण निष्पादन अनुशासन (execution discipline), समय पर डिलीवरी और लागत नियंत्रण में दक्षता बनाए रखना जरूरी होगा। इन कारकों पर अच्छी पकड़ होने से ही यह कंपनियां दीर्घकालिक सफलता हासिल कर पाएंगी। शेयर बाजार में भी इन कंपनियों के शेयरों की मांग बढ़ रही है क्योंकि निवेशक मजबूत ऑर्डर बुक और PSU की विश्वसनीयता की वजह से इन स्टॉक्स को पसंद कर रहे हैं। Mazagon Dock Shipbuilders का मार्केट कैप ₹1.09 लाख करोड़, Cochin Shipyard का ₹44,473 करोड़ और Garden Reach Shipbuilders का ₹29,650 करोड़ है। EPS के लिहाज से MDL का ₹10.39, CSL का ₹7.14 और GRSE का ₹10.49 है। ऑर्डर बुक की स्थिति भी मजबूत है; MDL के पास ₹29,918 करोड़, CSL के पास ₹22,500 करोड़ और GRSE के पास ₹22,680 करोड़ के ऑर्डर हैं। इन संकेतों से साफ है कि Defence Shipbuilding सेक्टर में आने वाले वर्षों में बड़े बदलाव और विकास की संभावनाएं हैं

भारत की समुद्री सुरक्षा और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में यह क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। Mazagon Dock Shipbuilders, Cochin Shipyard और Garden Reach Shipbuilders जैसी कंपनियां इस बढ़ती मांग से लाभान्वित हो रही हैं और निवेशकों के लिए भी यह क्षेत्र आकर्षक बनता जा रहा है। हालांकि, चुनौतियां बनी रहेंगी, लेकिन सरकार की प्रतिबद्धता और उद्योग की दक्षता से यह सेक्टर मजबूती से आगे बढ़ेगा

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