Ajit Banerjee, जो Shriram Life Insurance के President और Chief Investment Officer हैं, ने हाल ही में oil marketing companies (OMCs) के बारे में अपनी महत्वपूर्ण राय साझा की है। उन्होंने कहा है कि OMCs वर्तमान स्तर पर fair valuations पर ट्रेड कर रही हैं और जो निवेशक मध्य से लंबी अवधि के लिए सोच रहे हैं, उनके लिए अभी कुछ एक्सपोजर लेना समझदारी भरा हो सकता है। Banerjee ने कहा कि सरकार ने OMCs को पर्याप्त marketing margin प्रदान करके, LPG की under-recoveries का भुगतान करके और मुफ्त LPG domestic cylinders की संख्या कम करके उनका समर्थन किया है। इन कदमों से OMCs को अपने बड़े capital expenditure को पूरा करने में मदद मिल रही है। हालांकि, Banerjee ने यह भी चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों की अस्थिरता को ध्यान में रखना आवश्यक होगा, क्योंकि OMCs की निर्भरता आयातित कच्चे तेल पर अधिक है और वर्तमान geopolitical परिस्थितियां भी काफी अनिश्चित हैं। उन्होंने यह भी बताया कि FY27 के लिए marketing margins के लिए Street की अपेक्षाएं मौजूदा स्तरों से कम हैं, जहां diesel और petrol के लिए ये margins प्रति लीटर 10-12 रुपये के बीच हैं। इसके साथ ही refining और petrochemical सेक्टर में निवेश भी जल्द ही कमाई में योगदान देने लगेगा। इस दृष्टिकोण से, Banerjee ने कहा कि मध्य से लंबी अवधि में OMCs में निवेश के लिए यह सही समय हो सकता है। बाजार की वर्तमान स्थिति पर Banerjee ने कहा कि tariff से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण निकट अवधि में मार्केट में volatility बनी रहेगी। उन्होंने बताया कि Nifty 50 पिछले एक महीने में लगभग 4% गिर चुका है, जो मुख्य रूप से अमेरिकी सरकार द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ की आशंकाओं के कारण है
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यह संभावना है कि मार्केट ने इस टैरिफ को पहले ही अपनी कीमतों में शामिल कर लिया है। इसलिए, जब तक कोई नया नकारात्मक समाचार नहीं आता, तब तक बाजार मुख्य रूप से range-bound ही रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी institutional investors (FIIs) लगातार एक महीने से बिकवाली कर रहे हैं, लेकिन domestic investors और DIIs की खरीदारी से बाजार को गहरा correction नहीं देखने को मिला है। Indian investors की मानसिकता में पिछले कुछ वर्षों में काफी बदलाव आया है। Banerjee के अनुसार, Covid के बाद निवेशकों ने equity investments के प्रति अपने नजरिए को काफी परिपक्व किया है। अब वे portfolio को कम से कम तीन से पांच साल के horizon पर रखते हैं और market dips को panic selling की बजाय निवेश का अवसर मानते हैं। इस बदलाव के कारण DIIs और retail investors ने बाजार को स्थिरता प्रदान की है और FIIs के आउटफ्लो को offset किया है। IT सेक्टर के बारे में Banerjee ने कहा कि हाल ही में घोषित अमेरिकी टैरिफ सीधे IT सेवाओं को प्रभावित नहीं करते, लेकिन इसके द्वितीयक प्रभाव हो सकते हैं। भारतीय IT सेक्टर की अमेरिकी बाजार पर काफी निर्भरता है, इसलिए अमेरिकी आर्थिक स्थिति व टैरिफ के प्रभाव से तकनीकी खर्चों में कमी आ सकती है, जो भारतीय IT कंपनियों की Growth prospects और revenues पर दबाव डाल सकता है। Q1FY26 के नतीजों में भी इस बात का प्रमाण मिला है कि नए कॉन्ट्रैक्ट्स की धीमी गति और मौजूदा डील्स में कटौती का असर पड़ा है
IT सेक्टर वर्तमान में 1YF P/E 23.8x पर ट्रेड कर रहा है, जो इसके पिछले 10 वर्षों के औसत से थोड़ा अधिक है। Banerjee के मुताबिक, बेहतर निवेश का मौका तब आएगा जब वैल्यूएशंस 10 साल के औसत या उससे नीचे आएंगे। Power utilities सेक्टर के बारे में Banerjee ने कहा कि वर्तमान में इस सेक्टर के स्टॉक्स फुली वैल्यूड हैं। इसलिए निवेशकों के लिए यह बेहतर होगा कि वे किसी correction का इंतजार करें ताकि बेहतर एंट्री पॉइंट मिल सके। हालांकि, लंबी अवधि में ऊर्जा क्षेत्र, चाहे वह conventional हो या non-conventional, भारत में 6% की दर से बढ़ने की संभावना है, जिससे यह सेक्टर भविष्य में आकर्षक निवेश विकल्प बन सकता है। कुल मिलाकर, Ajit Banerjee ने निवेशकों को संयम और दीर्घकालिक सोच के साथ निवेश करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि बाजार में फिलहाल उतार-चढ़ाव सामान्य हैं, लेकिन सही सेक्टरों में सही समय पर निवेश लाभकारी साबित हो सकता है। OMCs में सरकार के समर्थन और सुधारों को देखते हुए, यह सेक्टर मध्य से लंबी अवधि के निवेश के लिए उपयुक्त माना जा सकता है। वहीं, IT और Power सेक्टर में निवेश के लिए थोड़ी और सावधानी और सही समय का इंतजार करना बेहतर रहेगा। इस प्रकार, निवेशकों को चाहिए कि वे सरकार की नीतियों, वैश्विक आर्थिक परिप्रेक्ष्य और सेक्टर विशेष के fundamentals को ध्यान में रखकर अपने पोर्टफोलियो का निर्माण करें और market volatility को अवसर के रूप में देखें