भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs/FPIs) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) के बीच विरोधाभासी रुख देखने को मिला। जहां FIIs ने लगभग ₹3,644 करोड़ की बड़ी बिकवाली की, वहीं DIIs ने ₹5,623 करोड़ की नई खरीदारी कर बाजार को सपोर्ट दिया। FIIs ने कुल ₹11,350 करोड़ के शेयर खरीदे लेकिन ₹14,994 करोड़ के शेयर बेचे, जिससे उनका शुद्ध विक्रेता रुख सामने आया। इसके उलट DIIs ने ₹13,982 करोड़ के शेयर खरीदे और ₹8,358 करोड़ के शेयर बेचे, जिससे उनके शुद्ध खरीदार होने का संकेत मिला। वर्ष 2023 में अब तक FIIs ने भारतीय इक्विटी में कुल मिलाकर ₹1.84 लाख करोड़ की शुद्ध बिकवाली की है, वहीं DIIs ने ₹4.60 लाख करोड़ की मजबूत खरीदारी की है। इससे यह साफ होता है कि घरेलू निवेशक विदेशी निवेशकों की बिकवाली को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बाजार में इस दिन सकारात्मकता बनी रही और Nifty ने 132 अंकों की बढ़त के साथ 24,619 पर बंद किया, जबकि Sensex 456 अंकों की तेजी के साथ 80,712 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार की यह मजबूती मुख्य रूप से भारत में खुदरा मुद्रास्फीति (retail inflation) के 1.55% पर आठ साल के निचले स्तर पर आ जाने से आई है, जो जुलाई में जून के 2.10% के मुकाबले काफी कम है। इस आंकड़े ने निवेशकों के बीच राहत की सांस ली और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद सकारात्मक माहौल बनाया। विशेषज्ञ सिद्धार्थ खेमा ने बताया कि भारत की खुदरा मुद्रास्फीति में इस गिरावट से बाजार की धारणा बेहतर हुई है
उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री के अगले महीने अमेरिका में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा में जाने की संभावना और द्विपक्षीय वार्ता की उम्मीदें भी बाजार की बढ़त में सहायक रही हैं। इसके अलावा, विदेश मंत्री की 21 अगस्त को रूस की यात्रा, जो शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के दौरान होगी, भी महत्वपूर्ण है। यह यात्रा रूस और अमेरिका के बीच 15 अगस्त को अलास्का में हुई राष्ट्रपति की बैठक के ठीक बाद हो रही है और इससे भारत के रूसी तेल आयात पर लागू द्वितीयक टैरिफ कम होने की संभावना जताई जा रही है। वैश्विक बाजार संकेतों ने भी भारतीय बाजार को मजबूती दी। अमेरिकी खुदरा मुद्रास्फीति 2.7% पर आई, जो 2.8% के अनुमान से कम थी। इससे इस बात की संभावना बढ़ गई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व सितंबर में ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। इस खबर ने वैश्विक निवेशकों को उत्साहित किया और भारत के शेयर बाजार में भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ा। साथ ही, निफ्टी मिडकैप100 और स्मॉलकैप100 दोनों में 0.6% की बढ़त दर्ज की गई। सेक्टोरल स्तर पर हेल्थकेयर (+2.1%) और फार्मा (+1.7%) सेक्टर ने बाजार की रैली में अहम योगदान दिया। Apollo Hospitals और Alkem Labs की मजबूत आय रिपोर्ट ने इन सेक्टर्स को बढ़ावा दिया
हालांकि, सोलर सेल/मॉड्यूल निर्माताओं के शेयर दबाव में रहे क्योंकि अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने भारत से PV (photovoltaic) उत्पादों के आयात पर एंटी-डंपिंग और काउंटरवेलिंग ड्यूटी जांच शुरू की है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार रेंज-बाउंड रहेगा और घरेलू आर्थिक विषयों पर फोकस बना रहेगा। हालांकि, निवेशक अमेरिकी टैरिफ नीतियों और अमेरिका-रूस के बीच वार्ताओं के परिणामों पर भी नजर रखेंगे, जो इस सप्ताह के अंत तक सामने आएंगे। इस तरह, FIIs की बिकवाली के बावजूद DIIs की खरीदारी और घरेलू मुद्रास्फीति के कम आंकड़े ने भारतीय शेयर बाजार को मजबूती दी है। वैश्विक आर्थिक संकेतों और कूटनीतिक गतिविधियों पर नजर बनाए रखना अब निवेशकों के लिए जरूरी हो गया है क्योंकि ये कारक बाजार की दिशा निर्धारित कर सकते हैं