11 अगस्त 2025 को Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने एक नई पहल SWAGAT-FI (Single Window Automatic & Generalised Access for Trusted Foreign Investors) की घोषणा की है, जिसका मकसद विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय सिक्योरिटीज मार्केट की पहुंच को आसान बनाना है। यह नया regulatory framework खासतौर पर low-risk foreign investors को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है ताकि वे एक ही खिड़की के माध्यम से बिना बार-बार दस्तावेज जमा किए भारत में निवेश कर सकें। SEBI का मानना है कि इससे भारत का ग्लोबल निवेश आकर्षण बढ़ेगा और compliance की प्रक्रिया भी सरल होगी। SWAGAT-FI के तहत eligible foreign investors को streamlined single-window registration का लाभ मिलेगा। इसका मतलब यह है कि एक बार रजिस्ट्रेशन हो जाने पर वे अलग-अलग निवेश मार्गों जैसे Foreign Portfolio Investors (FPIs) और Foreign Venture Capital Investors (FVCIs) के जरिए बिना किसी अतिरिक्त onboarding के निवेश कर सकेंगे। खास बात यह है कि SEBI ने sovereign wealth funds, central banks, government-owned funds, multilateral agencies, regulated public retail funds, insurance और pension funds जैसे entities को low-risk category में रखा है। ये संस्थाएं अपने देश में मजबूत governance के अंतर्गत आती हैं, इसलिए इन्हें SWAGAT-FI के अंतर्गत लाया गया है। भारत में 30 जून 2025 तक कुल 11,913 FPIs रजिस्टर्ड हैं, जिनके पास कुल ₹80.83 लाख करोड़ के assets हैं। SEBI के अनुमान के मुताबिक, इन assets का 70% से अधिक हिस्सा उन्हीं संस्थाओं के पास है जो SWAGAT-FI के अंतर्गत eligible होंगी। इससे स्पष्ट होता है कि SWAGAT-FI लागू होने पर विदेशी निवेशकों की संख्या और निवेश दोनों में काफी वृद्धि हो सकती है
SEBI ने इस नई framework के तहत कई महत्वपूर्ण operational सुधार भी प्रस्तावित किए हैं। इनमें से एक है dual registration option, जिससे SWAGAT-FIs एक साथ FPI और FVCI के रूप में बिना अतिरिक्त paperwork के रजिस्टर हो सकेंगे। इसका फायदा यह होगा कि निवेशक listed securities के साथ-साथ unlisted sectors और startups में भी आसानी से निवेश कर पाएंगे। इसके अलावा, compliance cycle को भी बढ़ाकर 10 साल करने का प्रस्ताव है, जो पहले 3 या 5 साल होता था। इसका मतलब यह है कि रजिस्ट्रेशन renewal, fee submission और KYC review अब हर 10 साल में होंगे, जिससे निवेशकों की प्रक्रिया और भी आसान हो जाएगी। एक और बड़ा बदलाव है कि SWAGAT-FIs को अपनी सभी होल्डिंग्स के लिए single demat account इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाएगी। इससे FPIs, FVCIs या संबंधित investment instruments की होल्डिंग को एक जगह मैनेज करना संभव होगा। Depositories इस निवेश को regulatory oversight के लिए tag करेंगे। इससे न सिर्फ transparency बढ़ेगी बल्कि संचालन में भी आसानी होगी। इसके अलावा, वर्तमान में NRI, OCI और RI निवेशकों द्वारा कुल मिलाकर 50% की लिमिट होती है, लेकिन SWAGAT-FI eligible funds के लिए इस restriction को हटा दिया जाएगा
इससे विदेशी निवेशकों को और अधिक निवेश करने का अवसर मिलेगा और भारतीय बाजार में विदेशी पूंजी का प्रवाह और तेज होगा। SEBI ने इस प्रस्तावित framework पर सार्वजनिक परामर्श भी शुरू किया है और सुझाव 29 अगस्त 2025 तक मांगे गए हैं। इस feedback के आधार पर SWAGAT-FI को और बेहतर बनाया जाएगा और अंतिम रूप दिया जाएगा। यह दर्शाता है कि SEBI इस प्रक्रिया में सभी हितधारकों की राय को महत्व देता है और एक पारदर्शी तथा समावेशी नीति बनाने की कोशिश कर रहा है। कुल मिलाकर, SEBI का SWAGAT-FI फ्रेमवर्क भारतीय पूंजी बाजार को विदेशी निवेशकों के लिए अधिक सुलभ और investor-friendly बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे निवेश प्रक्रिया में सरलता, compliance में लचीलापन और निवेश विकल्पों में विविधता आएगी। यदि यह योजना लागू होती है, तो भारत वैश्विक निवेश के लिए और भी आकर्षक गंतव्य बन सकता है और विदेशी पूंजी प्रवाह को नए स्तर पर पहुंचा सकता है। इस पहल से न केवल विदेशी निवेशकों को फायदा होगा, बल्कि भारतीय बाजार की स्थिरता और विकास दर भी मजबूत होगी। SEBI की यह योजना भारतीय वित्तीय बाजार के विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती है और देश को वैश्विक निवेश मानचित्र पर शीर्ष पर ले जाने में मदद करेगी