Dalal Street पर छाया Bear का साया: छह हफ्तों से लगातार गिरावट, क्या Nifty 50 टूटेगा 24,000 के नीचे?

Saurabh
By Saurabh

Dalal Street पर बाजार की हालत लगातार खराब होती जा रही है। यह छठा लगातार हफ्ता है जब बाजार में Bearish Sentiment ने बाज़ी मारी है, जो कोविड-19 संकट के बाद सबसे लंबी गिरावट की श्रृंखला है। इस दौरान Nifty 50 लगभग 0.82 प्रतिशत गिरकर 24,363 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि BSE Sensex भी 742 अंक नीचे आकर 79,858 पर पहुंच गया। Nifty Midcap और Smallcap 100 भी क्रमशः 1.1 प्रतिशत और 1.4 प्रतिशत की गिरावट के साथ कमजोर प्रदर्शन किया है। इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे बड़ी वजह है अमेरिका द्वारा भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाना, जो ट्रंप प्रशासन ने भारत के रूस से तेल खरीदने और बेचने के कारण लगाया है। इस फैसले ने बाजार में भारी बेचवाली और अनिश्चितता पैदा कर दी है। पहली बार 25 प्रतिशत टैरिफ 7 अगस्त से लागू हुआ था, और अब अतिरिक्त 25 प्रतिशत 21 दिन बाद प्रभावी होगा। इस बीच, अमेरिकी अधिकारियों की भारत यात्रा और द्विपक्षीय व्यापार समझौते की संभावित बातचीत भी निवेशकों की नजर में है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने भी बाजार की कमजोरी को बढ़ावा दिया है

पिछले हफ्ते FIIs ने करीब 10,652 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे इस महीने कुल बिकवाली 14,019 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) ने हर गिरावट पर खरीदारी की है और इस हफ्ते 33,609 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। इस वजह से बाजार को कुछ हद तक सपोर्ट मिला है, परंतु FII की बेचवाली जारी रहने की स्थिति में दबाव बना रहेगा। तकनीकी दृष्टि से भी बाजार कमजोर दिख रहा है। Nifty 50 ने लगातार Lower Highs-Lower Lows का पैटर्न बनाया है, और MACD ने नकारात्मक क्रॉसओवर दिया है। RSI भी 50 के नीचे गिरकर 49.50 पर आ गया है, जो Bearish Signal है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, Nifty 50 24,200 (200-day EMA) और 24,000 (50-week EMA) के स्तर तक गिर सकता है। हालांकि, ओवरसोल्ड स्थिति में कुछ रिबाउंड की संभावना भी बनी हुई है, लेकिन 24,500 और 24,700 के ऊपर मजबूती दिखाने तक रैलियों पर सावधानी बरतनी होगी। आगामी हफ्ते बाजार के लिए कई महत्वपूर्ण घटनाएं हैं। अमेरिका और भारत दोनों के मुद्रास्फीति (Inflation) के आंकड़े आने वाले हैं, जो अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर निर्णय को प्रभावित कर सकते हैं

12 अगस्त को अमेरिकी मुद्रास्फीति रिपोर्ट जारी होगी, जिसमें वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन Jerome Powell ने भी कहा है कि मुद्रास्फीति अभी भी ऊंची है, जिससे ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसके अलावा, अमेरिका और चीन के बीच 12 अगस्त को समाप्त होने वाले 90 दिन के व्यापार समझौते की समय सीमा भी बाजार की निगाहों में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समय सीमा को 90 दिन और बढ़ाने की संभावना है, क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता जारी है। इस बीच, 15 अगस्त को ट्रंप और पुतिन की संभावित मुलाकात भी विश्व राजनीति और तेल बाजार पर असर डाल सकती है। भारत में भी मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर नजर रहेगी। जुलाई में खुदरा मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत से नीचे आने की उम्मीद है, जो लगातार नौवें महीने होगा जब मुद्रास्फीति में गिरावट दर्ज होगी। इससे घरेलू आर्थिक स्थिति को लेकर सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। वहीं, 14 अगस्त को WPI (Wholesale Price Index) के आंकड़े भी जारी होंगे, जिनमें नकारात्मक रुख जारी रहने की संभावना है। कॉर्पोरेट इक्विटी के लिहाज से भी जून तिमाही के परिणामों की बाढ़ आने वाली है

लगभग 2,000 से अधिक कंपनियां अपने परिणाम जारी करेंगी, जिनमें Oil and Natural Gas Corporation, Hindalco Industries, Apollo Hospitals Enterprises जैसे बड़े नाम शामिल हैं। अन्य प्रमुख कंपनियां जैसे NSDL, Nykaa, Bharat Petroleum, Indian Oil Corporation, Bajaj Consumer Care, Hindustan Aeronautics, Jubilant FoodWorks आदि भी अपने तिमाही नतीजे देंगे। इन परिणामों से बाजार की दिशा तय हो सकती है, खासकर उन सेक्टरों में जिनका घरेलू उपभोग से सीधा संबंध है। IPO का सिलसिला अगले हफ्ते भी जारी रहेगा, हालांकि पिछले कुछ हफ्तों के मुकाबले कम संख्या में। BlueStone Jewellery & Lifestyle और Regaal Resources के IPO मुख्य बाजार में खुलेंगे, जबकि SME सेगमेंट में Icodex Publishing Solutions अपनी शुरुआत करेगी। इसके अलावा, कई कंपनियों के लिस्टिंग भी होने वाले हैं, जो बाजार में नई हलचल पैदा कर सकते हैं। विदेशी मुद्रा की बात करें तो भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 87.44 के स्तर पर बंद हुआ, जो टैरिफ के कारण रिकॉर्ड निचले स्तर 87.98 से थोड़ा मजबूत हुआ है। Brent crude oil के दाम भी 4.42 प्रतिशत गिरकर 66.59 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं, जो बाजार के लिए राहत की बात है। विकल्प बाजार (F&O) के आंकड़ों से भी पता चलता है कि Nifty 50 के लिए 24,500-24,600 का क्षेत्र प्रतिरोध बना हुआ है, जबकि 24,000 और 24,300 स्तर मजबूत समर्थन प्रदान कर रहे हैं। FIIs के शॉर्ट पोजीशन में तीव्रता देखने को मिल रही है, जो बाजार के लिए Bearish सिग्नल है

कुल मिलाकर, Dalal Street पर दबाव कायम है और आने वाले हफ्ते में बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ट्रेड वॉर की अनिश्चितता, विदेशी निवेशकों की बेचवाली और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों के बीच निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। हालांकि, घरेलू आर्थिक स्थिरता और DII की खरीदारी से बाजार को कुछ सहारा मिलने की संभावना बनी हुई है, लेकिन फिलहाल Bearish माहौल जारी रहने का अनुमान है

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