तीन हफ्तों की लगातार बिकवाली के बाद Foreign Portfolio Investors (FPI) ने अचानक अपनी नीति बदली और एक दिन में 1,932 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जो जून 26 के बाद सबसे बड़ी एकल सत्र की खरीदारी है। इस बदलाव से यह संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशक भारत के बाजार में जोखिम लेने के प्रति अपनी धारणा में बदलाव ला सकते हैं या कम से कम फिलहाल अपनी बिकवाली रोक सकते हैं। वहीं Domestic Institutional Investors (DII) ने भी इस दौरान 7,723 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जो कि बाजार में बढ़ती रुचि और विश्वास का स्पष्ट संकेत है। NSE के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, DIIs ने कुल 16,682 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और 8,958 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इसी दौरान FPIs ने 17,682 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और 15,749 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। साल की शुरुआत से अब तक, FIIs कुल 1.76 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके हैं, जबकि DIIs ने लगभग 4.45 लाख करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। यह आंकड़ा यह दर्शाता है कि घरेलू संस्थागत निवेशक विदेशी निवेशकों की तुलना में अधिक सक्रिय और भरोसेमंद बने हुए हैं। हालांकि, इस बीच अमेरिका ने भारत-रूस के द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के तहत भारत को मिलने वाले तेल के लाभों पर कड़े टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इस भू-राजनीतिक तनाव का असर खासतौर पर फार्मा सेक्टर पर पड़ा है, जहां अमेरिकी बाजार की भारी हिस्सेदारी के कारण FII की बिकवाली देखी गई। इसके बावजूद, इस नए खरीदारी के रुख से पता चलता है कि FIIs अब इन चुनौतियों के बावजूद भारत में संभावित मजबूती या मूल्यांकन की संभावनाएं देख रहे हैं
आज के बाजार में Nifty ने पिछले दिन की रिकवरी को बनाए रखने में असफलता दर्ज की और लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ, जो तीन महीने के निचले स्तर पर था। US टैरिफ के प्रभाव को लेकर बढ़ती चिंताओं ने निवेशकों की धारणा पर दबाव डाला। Sensex ने भी 65.47 अंक या 0.95 प्रतिशत की गिरावट के साथ 79,857.79 पर बंद हुआ। Religare Broking Ltd के SVP, Research Ajit Mishra ने कहा कि “शुरुआत में बाजार स्थिर था, लेकिन जैसे-जैसे दिन बढ़ा, Nifty धीरे-धीरे नीचे की ओर डगमगाने लगा और दिन के आखिरी घंटे में तेज बिकवाली ने इसे 24,363 के स्तर तक गिरा दिया। ” इस गिरावट के चलते सभी प्रमुख सेक्टर्स लाल निशान में बंद हुए, जिसमें Realty, Metal और Auto सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। व्यापक सूचकांक भी लगभग सवा प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार के इस उतार-चढ़ाव के बीच, भारतीय निवेशकों और विदेशी निवेशकों के बीच खरीद-बिक्री का संतुलन धीरे-धीरे बदल रहा है। FIIs की यह अचानक बड़ी खरीदारी इस बात का संकेत हो सकती है कि वे भारत के बाजार में आने वाले समय में सुधार की उम्मीद कर रहे हैं या फिर बाजार में मौजूद सस्ते अवसरों का फायदा उठाना चाहते हैं। वहीं DIIs की मजबूत खरीदारी ने भी बाजार में स्थिरता का भरोसा दिया है। हालांकि, अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति की अनिश्चितता अभी बनी हुई है, जो निवेशकों के मन में संशय पैदा कर रही है
इस स्थिति में बाजार ने एक मिश्रित प्रतिक्रिया दी है, जहां तकनीकी रूप से कमजोर प्रवृत्ति के बावजूद निवेशकों ने खरीदारी भी जारी रखी है। इस पूरे परिदृश्य में यह स्पष्ट है कि भारतीय बाजार फिलहाल उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहा है, लेकिन विदेशी और घरेलू दोनों ही निवेशकों की सक्रियता से यह संकेत मिल रहा है कि वे भारत की अर्थव्यवस्था और बाजार की संभावनाओं में विश्वास बनाए हुए हैं। आगामी सत्रों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह खरीदारी प्रवृत्ति जारी रहती है और बाजार एक स्थायी सुधार की ओर बढ़ता है या फिर वैश्विक दबावों के कारण फिर से दबाव में आता है