भारतीय शेयर बाजार में 8 अगस्त को भारी दबाव देखने को मिला, जब प्रमुख सूचकांक Sensex और Nifty दोनों लाल निशान में बंद हुए। अमेरिकी और भारत के बीच टैरिफ को लेकर जारी तनाव ने निवेशकों की संवेदनशीलता को प्रभावित किया और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने अपनी कैश मार्केट में हिस्सेदारी लगातार कम करनी शुरू कर दी। इस दबाव के चलते Sensex 765.47 अंक या 0.95 फीसदी की गिरावट के साथ 79,857.79 अंक पर बंद हुआ, जबकि Nifty 232.85 अंक यानी 0.95 फीसदी नीचे आकर 24,363.30 पर कारोबार समाप्त किया। इस गिरावट में अधिकांश सेक्टर्स शामिल थे, जिसमें ऑटो, मेटल, आईटी और फार्मा सेक्टर की कंपनियां प्रमुख रूप से नीचे आईं। कुल मिलाकर 2380 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 1494 शेयर बढ़े और 137 शेयर स्थिर रहे। मौजूदा माह में भारतीय इक्विटी के stretched valuations के कारण विदेशी निवेशकों द्वारा बिकवाली का दबाव लगातार बना हुआ है। अगस्त के अब तक के सभी ट्रेडिंग दिनों में FIIs ने कुल मिलाकर करीब ₹15,950 करोड़ की बिकवाली की है। खासतौर पर, 8 अगस्त को Nifty में दिन के निचले स्तर से 250 अंकों की तेजी मुख्यतः शॉर्ट कवरिंग के कारण आई, जिसे घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) के ₹10,864 करोड़ के मजबूत खरीदारी समर्थन ने बल दिया। Geojit Investments Ltd के Chief Investment Strategist V K Vijayakumar के अनुसार, अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ विवाद की वजह से FIIs का कैश मार्केट से बाहर निकलना जारी रह सकता है, लेकिन घरेलू DIIs की मजबूत हिस्सेदारी और म्यूचुअल फंड निवेश बाजार को गहरे गिरावट से बचाने में सहायक होंगे। NSE के सेक्टोरल इंडेक्स में अधिकांश सेक्टर्स लाल निशान में रहे
Realty सेक्टर 1.93%, Metal 1.71%, Consumer Durables 1.64%, और Midcaps 1.49% की गिरावट के साथ सबसे अधिक प्रभावित रहे। ऑटो, फार्मा, इंफ्रास्ट्रक्चर, प्राइवेट बैंक और IT सेक्टर भी बाजार की कमजोरी में योगदान देने वाले थे। वहीं PSU बैंक और मीडिया सेक्टर में मात्र मामूली गिरावट देखी गई। Nifty Bank 0.78%, FMCG 0.72%, और Energy 0.53% नीचे आए। Oil & Gas सेक्टर ही 0.06% की मामूली बढ़त के साथ अकेला गेनर रहा। मार्केट में वोलैटिलिटी भी बढ़ी, जिससे India VIX 2.05% बढ़कर 11.93 पर पहुंच गया। व्यक्तिगत स्टॉक्स की बात करें तो Coforge में भारी गिरावट देखी गई। ये स्टॉक ₹1,605 के स्तर पर 6% टूट गया, जो चार में से तीसरी बार गिरावट थी। इसका कारण Sabre Corp का Nasdaq पर 35% तक गिर जाना था, जो Coforge का प्रमुख क्लाइंट है। Sabre Corp की तिमाही आय और EBITDA उम्मीदों से कम रही
दूसरी ओर, National Securities Depository Ltd. (NSDL) के शेयरों में जोरदार तेजी देखी गई। IPO के बाद तीसरे लगातार सत्र में यह स्टॉक 18% उछला, और तीन ट्रेडिंग दिनों में कुल 67% की बढ़त दर्ज की। Tata Motors के शेयर भी लगभग 1% गिर गए, जो लगातार तीसरे दिन नुकसान में रहे। कंपनी के Q1 परिणामों को लेकर निवेशक सतर्क दिखे। छह ब्रोकरेज फर्मों के सर्वे के अनुसार, Tata Motors की सालाना आय में 8.7% की गिरावट आ सकती है, जो ₹98,600 करोड़ के करीब रहने का अनुमान है। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, 24,450 का स्तर Nifty के लिए मजबूत समर्थन क्षेत्र है। Dhupesh Dhameja, SAMCO Securities के अनुसार, जब तक यह स्तर decisively टूटता नहीं है, तब तक किसी भी गिरावट पर खरीदारी की संभावना बनी रहती है। दैनिक चार्ट पर RSI लगभग 40 के आसपास है, लेकिन इसमें पॉजिटिव डाइवर्जेंस दिख रहा है, जो मंदी की गति में कमी का संकेत है। इन्ट्राडे संकेतक भी ओवरसोल्ड क्षेत्र से पलटाव की ओर इशारा कर रहे हैं। कुल मिलाकर बाजार का स्ट्रक्चर ओवरसोल्ड स्थिति में है, जिससे निवेशकों को नई खरीदारी के अवसर मिल सकते हैं
Nifty के टॉप गेनर्स में Titan Company, NTPC, HDFC Life, Dr Reddy’s Laboratories और Coal India शामिल रहे। वहीं, Adani Enterprises, Bharti Airtel, Shriram Finance, IndusInd Bank और Hindalco प्रमुख लॉसर्स रहे। इस पूरे परिदृश्य में बाजार की दिशा विदेशी निवेशकों की बिकवाली और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी पर निर्भर करेगी, जबकि टैरिफ तनाव से जुड़ी अनिश्चितता अभी भी सेंटीमेंट पर दबाव बनाए रखेगी