सेक्यूरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने बड़े IPOs के लिए निवेश के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है, जो भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। खासतौर पर, जिन IPOs का आकार ₹5,000 करोड़ से ऊपर होता है, उनमें Retail Investors की हिस्सेदारी घटाकर 35% से 25% करने की योजना बनाई गई है। वहीं, Qualified Institutional Buyers (QIBs) के लिए आरक्षित हिस्से को बढ़ाकर 50% से 60% किया जाएगा। इसके साथ ही, Mutual Funds के लिए भी आरक्षण बढ़ाकर 5% से 15% करने का प्रस्ताव है, जो उन्हें बाजार में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का मौका देगा। SEBI की इस प्रस्तावित नीति का मकसद बड़े IPOs में निवेश की संरचना को बदलकर बाजार की मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप बनाना है। पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता, युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ऐसे में बड़े IPOs में Retail Investors के लिए पर्याप्त मांग जुटाना और उनकी भागीदारी बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। SEBI का मानना है कि जब बड़े IPOs में Retail Investors की हिस्सेदारी ज्यादा होती है, तो उन्हें भारी संख्या में आवेदन जमा करने पड़ते हैं, जो बाजार की मौजूदा स्थिति में सरल नहीं है। SEBI के आंकड़ों के अनुसार, 2020 से अब तक लगभग 280 IPOs के डेटा विश्लेषण से पता चला है कि औसत Retail Investor का आवेदन लगभग ₹20,000 का होता है। इसका मतलब यह हुआ कि ₹5,000 करोड़ के IPO के लिए कम से कम 7-8 लाख आवेदन और ₹10,000 करोड़ के IPO के लिए 17.5 लाख आवेदन की आवश्यकता होती है
ऐसे भारी आवेदन की संख्या जुटाना मुश्किल होता है, खासकर तब जब बाजार में अनिश्चितता और निवेशकों का उत्साह कम हो। SEBI का तर्क है कि Mutual Funds, जो QIB कैटेगरी में आते हैं, वे भी अंततः Retail Investors का पैसा प्रबंधित करते हैं। इसलिए, Mutual Funds के लिए आरक्षण बढ़ाने से Retail Investors की भागीदारी अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ेगी। इसका मतलब यह है कि सीधे Retail Investors की हिस्सेदारी कम करने के बावजूद, Mutual Funds के माध्यम से उनकी हिस्सेदारी बाजार में बनी रहेगी। SEBI का अनुमान है कि इस बदलाव के बाद Retail Investors के लिए कुल बिडिंग की क्षमता लगभग 46% से घटकर 44% रह जाएगी, जो एक मामूली अंतर है। इसके अलावा, SEBI ने Anchor Investors की संख्या बढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा है। अब तक, ₹250 करोड़ तक के आवंटन के लिए 5 से 10 Anchor Investors की अनुमति थी, जिसे बढ़ाकर 5 से 15 कर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक अतिरिक्त ₹250 करोड़ के लिए 15 नए Anchor Investors को शामिल करने की योजना है, जो IPO में निवेशकों की विविधता और स्थिरता को बढ़ाएगा। Anchor Investors में अब Life Insurance Companies और Pension Funds को भी शामिल करने का प्रस्ताव है। पहले केवल Mutual Funds को ही Anchor Portion में शामिल किया जाता था, लेकिन अब IRDAI के तहत पंजीकृत Life Insurance Companies और PFRDA के पेंशन फंड्स को भी इस श्रेणी में लाया जाएगा
इसके साथ ही, Anchor Portion का 33% आरक्षण बढ़ाकर 40% करने का सुझाव भी दिया गया है, जिसमें से एक-तिहाई हिस्सा Domestic Mutual Funds के लिए आरक्षित रहेगा और बाकी 7% Life Insurance Companies और Pension Funds के लिए रहेगा। SEBI यह भी सुनिश्चित करेगा कि यदि Life Insurance Companies और Pension Funds द्वारा निर्धारित आरक्षण के तहत निवेश कम होता है, तो वह हिस्सा Domestic Mutual Funds को आवंटित किया जाएगा। इस तरह से, निवेश की कमी की स्थिति में भी बाजार में स्थिरता बनी रहेगी और IPO प्रक्रिया में लंबित निवेश की समस्या नहीं आएगी। यह प्रस्ताव SEBI की ओर से जारी एक consultation paper के माध्यम से सामने आया है, जिसमें बाजार की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए IPO के नियमों में सुधार की जरूरत बताई गई है। SEBI का लक्ष्य है कि ये बदलाव IPO प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, स्थिर और निवेशकों के लिए आसान बनाएं ताकि बाजार की विश्वास बनाए रखा जा सके। इस कदम से बाजार में IPO के दौरान निवेशकों की भागीदारी और मांग में संतुलन आएगा, साथ ही बड़ी कंपनियों के शेयर बाजार में प्रवेश की प्रक्रिया आसान होगी। SEBI की यह पहल घरेलू Mutual Funds को भी बेहतर अवसर प्रदान करेगी, जिससे वे बड़े IPOs में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे। कुल मिलाकर, SEBI के इस प्रस्तावित बदलाव से IPO बाजार में Retail Investors की सीधे हिस्सेदारी थोड़ी कम होगी, लेकिन Mutual Funds के माध्यम से उनकी अप्रत्यक्ष भागीदारी बनी रहेगी। यह कदम बाजार की वर्तमान चुनौतियों को देखते हुए एक व्यावहारिक और संतुलित निर्णय माना जा रहा है, जो आने वाले IPO सत्रों को स्थिरता और सफलता की ओर ले जाएगा