Tata Communications पर 7800 करोड़ का AGR नोटिस, Q1 में मुनाफा 43% घटा! क्या कंपनी झेल पाएगी यह बड़ा झटका?

Saurabh
By Saurabh

Tata Communications के शेयर निवेशकों की नजर में आएंगे क्योंकि Department of Telecom (DoT) ने कंपनी को लगभग ₹7,800 करोड़ का “show-cause-cum-demand notice” जारी किया है। यह नोटिस Adjusted Gross Revenue (AGR) देयों के सिलसिले में जुलाई 17, 2025 को कंपनी को भेजा गया है, जिसमें वित्तीय वर्ष 2005-06 से लेकर 2023-24 तक की अवधि शामिल है। Tata Communications के Managing Director AS Lakshminarayan ने बताया कि 30 जून, 2025 तक कंपनी को Department of Telecommunications से कुल ₹7,827.55 करोड़ के demand notices मिले हैं, जो समय-समय पर संशोधित होते रहे हैं। Lakshminarayan ने कहा कि इन नोटिसों में ₹276.68 करोड़ की राशि भी शामिल है, जो कि ISP (Internet Service Provider) लाइसेंस के तहत FY 2010-11 और NLD (National Long Distance) लाइसेंस के तहत FY 2007 और FY 2010 के लिए कंपनी द्वारा दावित कटौतियों को अस्वीकार करने से जुड़ी है। कंपनी ने यह भी बताया कि उसके ILD (International Long Distance), NLD और ISP लाइसेंस से संबंधित अपीलें सुप्रीम कोर्ट और telecom tribunal TDSAT में लंबित हैं। MD ने स्पष्ट किया कि कंपनी की ये अपीलें अक्टूबर 24, 2019 के सुप्रीम कोर्ट के AGR फैसले के दायरे में नहीं आतीं, जो पुराने UASL (Unified Access Service License) टेलिकॉम लाइसेंस से संबंधित था। कंपनी का मानना है कि उसके सभी लाइसेंस UASL से अलग हैं और इस आधार पर, स्वतंत्र कानूनी राय लेकर Tata Communications ने अपनी स्थिति मजबूत मानते हुए विश्वास जताया है कि वे अपने पक्ष को अदालतों में सफलतापूर्वक साबित कर सकेंगे। सरकार के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, टेलिकॉम ऑपरेटरों पर FY19 तक कुल ₹1.65 लाख करोड़ की AGR देयता थी। मार्च 2022 तक के आंकड़ों में Bharti Airtel पर ₹31,280 करोड़, Vodafone Idea पर ₹59,236.63 करोड़, Reliance Jio पर ₹631 करोड़, BSNL पर ₹16,224 करोड़ और MTNL पर ₹5,009.1 करोड़ की देयता दर्ज थी। उस समय Tata Communications पर कोई AGR देयता दर्ज नहीं थी

वहीं, Tata Communications ने Q1 FY26 में अपने परिणाम घोषित किए, जिसमें कंपनी का consolidated profit 43% गिरकर ₹190.14 करोड़ रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹332.93 करोड़ था। कंपनी की consolidated income from operations में 6.5% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹5,959.85 करोड़ रही, जो Q1 FY25 के ₹5,592.32 करोड़ से अधिक है। Tata Communications के MD और CEO AS Lakshminarayan ने कहा कि “हालांकि मैक्रोइकॉनॉमिक दबाव और उद्योग में निरंतर चुनौतियां बनी हुई हैं, हमने इस तिमाही में स्थिर प्रदर्शन दिया है, जिसमें हमारे order book में दोहरे अंकों की वृद्धि और मार्जिन में मामूली सुधार शामिल है। ” कंपनी की डेटा सर्विसेज से होने वाली आमदनी में लगभग 9.5% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹5,151.72 करोड़ तक पहुंच गई। Tata Communications की यह स्थिति तब सामने आई है, जब टेलिकॉम क्षेत्र में AGR मुद्दे सरकार और कंपनियों के बीच विवाद का बड़ा कारण बने हुए हैं। यह पहली बार नहीं है जब टेलिकॉम कंपनियों को AGR देयों को लेकर भारी नोटिस मिला हो, लेकिन Tata Communications के मामले में इस भारी राशि के नोटिस से बाजार में असमंजस और निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। कंपनी ने अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखने का भरोसा दिया है, हालांकि इस नोटिस का वित्तीय और भावनात्मक प्रभाव कंपनी के शेयर प्रदर्शन पर पड़ना स्वाभाविक है। Tata Communications के शेयर बाजार में इस खबर के सामने आने के बाद उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं क्योंकि निवेशक इस बिंदु पर कंपनी की कानूनी स्थिति और वित्तीय मजबूती को लेकर सतर्क हो जाएंगे। टेलिकॉम सेक्टर के अन्य बड़े खिलाड़ी जैसे Bharti Airtel, Vodafone Idea, और Reliance Jio के AGR विवाद भी इसी तरह के संकट के संकेत देते हैं, लेकिन Tata Communications का मामला अलग इसलिए है क्योंकि इस पर अब तक AGR देयता की घोषणा नहीं हुई थी। कंपनी को आशा है कि उसका कानूनी पक्ष मजबूत होने के कारण यह नोटिस निरस्त हो सकता है और भविष्य में कंपनी अपने ऑपरेशन्स पर ध्यान केंद्रित कर सकेगी

फिलहाल Tata Communications की Q1 रिपोर्ट में लाभ में गिरावट ने निवेशकों के मन में सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं, लेकिन कंपनी के मैनेजमेंट का कहना है कि वे चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं और कारोबार को बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं। इस पूरे मामले से यह भी स्पष्ट होता है कि टेलिकॉम सेक्टर में सरकार और कंपनियों के बीच वित्तीय विवाद अभी भी जारी हैं, और ऐसे बड़े नोटिस से कंपनियों की वित्तीय स्थिति और निवेशकों का विश्वास प्रभावित हो सकता है। Tata Communications के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि आने वाले महीनों में कोर्ट के फैसले और कंपनी की रणनीतियां उसके भविष्य को निर्धारित करेंगी

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