वैश्विक पूंजी आज अनिश्चितता की लहरों में बह रही है। अमेरिका में COVID-19 के बाद की रिकवरी की आधारशिला मानी जाने वाली consumer resilience कमजोर पड़ने लगी है, जिससे household consumption पर खतरा मंडरा रहा है। वहीं, यूरोप के कड़े sanctions का असर भी कम होता दिख रहा है, जिससे न केवल आर्थिक बल्कि geopolitical नुकसान का भी खतरा बढ़ रहा है। इसी बीच, अमेरिका का नया stablecoins कानून fintech capital की दिशा को बदल सकता है, जिसका असर भारत जैसे विकासशील देशों पर भी पड़ेगा, जहां पहले से ही डिजिटल lenders के लिए regulatory tightening का दबाव बना हुआ है। इस वैश्विक अनिश्चितता के बीच, व्यापार में tariff uncertainties के चलते कई देशों ने अपनी व्यापार नीतियों में diversification को प्राथमिकता दी है। इसी संदर्भ में हाल ही में भारत और UK के बीच हुआ free trade pact एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह समझौता न केवल व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि भारतीय manufacturing सेक्टर के लिए नए export अवसर भी खोलेगा। विशेषज्ञों की मानें तो यह deal सही समय पर सही संकेत भेज रही है और इसके परिणामस्वरूप कुछ प्रमुख stocks में तेजी आ सकती है। भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था वैश्विक headwinds के बावजूद मजबूती से खड़ी है। RBI के ताजा bulletin में यह बात सामने आई है कि inflation में कमी आई है और demand indicators भी मजबूत बने हुए हैं
headline inflation पिछले कई वर्षों में सबसे कम स्तर पर पहुंच चुका है, जिससे rate cuts और liquidity infusions की उम्मीदें बढ़ी हैं। इस dovish monetary policy के चलते mutual funds ने अपने निवेश को small-caps की ओर बढ़ाया है, जबकि surplus liquidity के कारण corporate bond की मांग भी बढ़ी है। हालांकि, currency front पर कुछ चिंताएं बनी हुई हैं, खासकर rupee की स्थिति को लेकर। Q1 earnings season में private banks ने मिले-जुले नतीजे दिए हैं। ICICI Bank और HDFC Bank ने steady performance दिखाई, जबकि Mahindra Finance की rerating की संभावनाएं अब उसके execution और portfolio diversification पर निर्भर हैं। PNB Housing Finance ने भी बेहतर fundamentals और valuations के बलबूते वापसी की शुरुआत की है। Bajaj Finance का प्रदर्शन स्थिर रहा है, और Yes Bank की re-rating की संभावनाओं पर भी चर्चा जारी है। कॉर्पोरेट जगत में Reliance Industries ने अपने consumer verticals की मजबूती के साथ Q1 में अपनी transformation को दोहराया है। UltraTech Cement ने भी भारत के infrastructure build-out के सकारात्मक संकेत दिए। इसके विपरीत, CEAT को Camso acquisition के बाद बढ़ती debt और margin दबाव का सामना करना पड़ रहा है
Havells की summer demand कमजोर होने से नुकसान हुआ है, जो consumer-linked cyclicals की नाजुकता को दर्शाता है। वहीं, Himadri Speciality को global energy transition से जुड़ी battery chemicals value chain में एक संभावित long-term विजेता माना जा रहा है। IPO मार्केट में Brigade Hotel Ventures और Indiqube ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठता है कि क्या इन कंपनियों के valuations में growth पहले से ही शामिल है? Execution-heavy कंपनियां जैसे Eternal और GNG Electronics जोखिम लेने वाले निवेशकों के लिए आकर्षक हो सकती हैं। दूसरी ओर, Polycab ने Q1 में निरंतरता और स्केल के साथ बेहतर प्रदर्शन जारी रखा है। IT सेक्टर की स्थिति थोड़ी चिंता वाली बनी हुई है। Infosys ने अच्छी तिमाही दी और एक global Enterprise AI advisory council की स्थापना की है, लेकिन पूरे सेक्टर में profitability कमजोर रही। Zensar ने अपेक्षाकृत अच्छा प्रदर्शन किया, पर पश्चिमी देशों में discretionary spending में कमी की छाया बनी हुई है। Cyient फिर से उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। विशेषज्ञों का मानना है कि discretionary spends की कमी और अनिश्चित macroeconomic व geopolitical environment के कारण IT सेक्टर की revenue-growth कुछ और तिमाहियों तक muted रह सकती है। डिफेंस सेक्टर में Ideaforge को सिर्फ order wins नहीं, flawless execution की भी आवश्यकता है ताकि वह एक टेक्नोलॉजी प्रॉमिस से आगे बढ़ सके
वर्तमान दौर में तकनीक हर उद्योग का भविष्य तय करेगी। AI और automation की वजह से पारंपरिक उद्योग जैसे shipbuilding भी तेजी से बदल रहे हैं, और productivity gains मानव क्षमता से आगे निकल रहे हैं। निवेशक अब केवल macro tailwinds पर भरोसा नहीं कर सकते; जो कंपनियां long-term structural shifts के साथ खुद को align करेंगी, वही विजेता बनेंगी। भारतीय बाजार में यह समय बदलाव और नए अवसरों का है। India-UK Free Trade Pact से जुड़ी कंपनियों के लिए यह स्वर्णिम अवसर है। ऐसे में उन 10 stocks पर नजर रखना जरूरी है जो इस समझौते से लाभान्वित हो सकते हैं और निवेशकों को नए आयाम प्रदान कर सकते हैं। इस समझौते के तहत न केवल व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे, बल्कि भारतीय manufacturing का global footprint भी बढ़ेगा। इस बीच, global और domestic economic signals के बीच तालमेल बैठाना भारत के लिए चुनौती के साथ-साथ अवसर भी प्रस्तुत करता है। RBI की नीतियां, corporate earnings, और तकनीकी नवाचार मिलकर यह तय करेंगे कि अगला दौर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किस दिशा में जाएगा। जैसे William Gibson ने कहा था, “The future is already here—it’s just not evenly distributed.” भारतीय निवेशकों के लिए यह समय है तैयार रहने का, समझदारी से निवेश करने का और उन कंपनियों को पहचानने का जो इस बदलती दुनिया में नेतृत्व करेंगी