Indiqube Spaces Limited का ₹700 करोड़ का IPO पहले दिन investors के बीच निराशाजनक रुचि के चलते केवल 0.93 गुना सब्सक्राइब हो पाया है। कंपनी के शेयर की कीमत ₹237 प्रति शेयर तय की गई है, जो बाजार में सतर्कता को दर्शाती है। 23 जुलाई, 2025 को IPO के पहले दिन शाम 4:59 बजे तक के डेटा के अनुसार, कुल 1,47,254 आवेदन प्राप्त हुए, लेकिन संस्थागत निवेशकों की ओर से कमजोर प्रतिक्रिया ने इस सब्सक्रिप्शन को प्रभावित किया है। IPO के तीन मुख्य निवेशक वर्गों में सबसे अधिक मांग Retail Investors से देखने को मिली, जिन्होंने 3.63 गुना सब्सक्रिप्शन किया, जबकि Non-Institutional Investors (NII) ने 0.83 गुना और Qualified Institutional Buyers (QIB) ने महज 0.06 गुना सब्सक्रिप्शन किया। इस प्रकार, यह साफ है कि संस्थागत निवेशकों का भरोसा इस Managed Workplace Solutions प्रदाता कंपनी पर कम है। Anchor Investors ने पूरी तरह से 1 गुना सब्सक्रिप्शन किया है, जो IPO के शुरुआती चरण में स्थिरता का संकेत देता है। Indiqube Spaces की स्थापना 2015 में हुई थी और यह कंपनी तकनीक-आधारित और सतत workplace solutions प्रदान करती है। कंपनी के पास 115 केंद्रों का पोर्टफोलियो है, जिनमें से 105 ऑपरेशनल हैं, जो 8.40 मिलियन स्क्वायर फीट क्षेत्रफल में फैले हुए हैं। मार्च 2025 तक कंपनी की कुल बैठक क्षमता 186,719 है, और यह सात Tier I और ग्यारह Non-Tier I शहरों में सक्रिय है। कंपनी Bengaluru, Pune, Chennai, Mumbai, Noida, Gurugram, और Hyderabad जैसे प्रमुख शहरों में कार्यरत है
IPO के पहले दिन Retail Investors का उत्साह और Employees का 3 गुना सब्सक्रिप्शन इस बात का संकेत है कि व्यक्तिगत निवेशकों और कंपनी के कर्मचारियों को कंपनी में भरोसा है। कर्मचारियों को ₹22 प्रति शेयर का डिस्काउंट भी दिया गया है, जिससे उनकी भागीदारी मजबूत रही। हालांकि, Qualified Institutional Buyers का केवल 0.06 गुना सब्सक्रिप्शन और Non-Institutional Investors का 0.83 गुना सब्सक्रिप्शन कंपनी के प्रति संस्थागत निवेशकों के संदेह को दर्शाता है। खासकर QIB की बेहद कम भागीदारी से यह स्पष्ट होता है कि बड़े निवेशक इस IPO को लेकर सतर्क हैं। संस्थागत निवेशकों की इस हिचकिचाहट का एक बड़ा कारण कंपनी की वित्तीय स्थिति हो सकती है। Indiqube Spaces के वित्तीय नुकसान और नकारात्मक नेट वर्थ की खबरें निवेशकों के मन में चिंता पैदा कर रही हैं। बड़ी IPO साइज़ ₹700 करोड़ होने के कारण भी निवेशकों में जोखिम लेने की इच्छा कम नजर आ रही है। यह IPO मुख्य बोर्ड पर लिस्ट होने वाला है, लेकिन इसकी शुरुआत काफी धीमी रही है, जो बाजार की मौजूदा स्थितियों और कंपनी की वित्तीय मजबूती पर सवाल उठाती है। IPO के कुल आवेदन में Anchor Investors ने 1,32,62,658 शेयरों के लिए आवेदन किया, जबकि QIB ने मात्र 5,45,769 शेयरों के लिए बोली लगाई। Non-Institutional Buyers ने 36,49,086 शेयर मांगे, जबकि Retail Investors ने 1,06,92,486 शेयरों के लिए आवेदन किया
कर्मचारी वर्ग ने भी 2,09,160 शेयरों के लिए सब्सक्रिप्शन किया। कुल मिलाकर, IPO के मुकाबले 1,50,96,501 शेयरों के लिए आवेदन हुए, जबकि जारी किए गए शेयर 1,62,79,682 थे। Retail Investors की मांग में NII के भीतर छोटे HNI (sNII) की तुलना में बड़े HNI (bNII) निवेशकों की रूचि कम देखी गई। sNII ने 1.11 गुना सब्सक्रिप्शन किया जबकि bNII ने केवल 0.68 गुना। यह संकेत देता है कि छोटे और मध्यम निवेशक कंपनी के संभावित भविष्य को लेकर सकारात्मक हैं, लेकिन बड़े निवेशक अभी भी सर्तक हैं। Indiqube Spaces का उद्देश्य पारंपरिक ऑफिस अनुभव को आधुनिक और तकनीकी रूप से उन्नत कार्यस्थल में बदलना है। कंपनी कॉर्पोरेट हब्स और शाखा कार्यालयों के माध्यम से कर्मचारियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए इंटीरियर्स, सुविधाएं और सेवाएं प्रदान करती है। कंपनी के पास 625 स्थायी कर्मचारी हैं जो 15 शहरों में विस्तार कर रहे हैं। हालांकि, IPO के कमजोर सब्सक्रिप्शन से कंपनी के भविष्य को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ रही है। पहली दिन की मांग केवल 0.93 गुना रहना इस बात का प्रमाण है कि निवेशकों को अभी भी कंपनी की वित्तीय स्थिति, बाजार में प्रतिस्पर्धा और दीर्घकालिक विकास को लेकर संदेह है
IPO के अगले दिनों में सब्सक्रिप्शन की गति कैसे बढ़ती है, यह कंपनी की सफलता के लिए अहम होगा। इस IPO की शुरुआत में आई यह धीमी प्रतिक्रिया Indiqube Spaces के लिए एक चुनौती बन गई है। निवेशकों के भरोसे को मजबूत करने के लिए कंपनी को अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार के साथ-साथ बेहतर मार्केटिंग रणनीति अपनानी होगी। फिलहाल, IPO के पहले दिन की स्थिति से यह स्पष्ट हो गया है कि Institutional Investors की हिचकिचाहट के कारण Indiqube Spaces को अपनी पूंजी जुटाने में कठिनाई हो सकती है