2025 की जनवरी से जून तक के छह माह में IPO बाजार ने निवेशकों को खूब आकर्षित किया है। इस अवधि में कुल 24 mainboard IPOs लॉन्च हुए, जिनमें से लगभग 67 प्रतिशत कंपनियां अपने लिस्टिंग पर प्रीमियम पर ट्रेड करने में सफल रहीं। कुल फंडरेजिंग की बात करें तो यह आंकड़ा ₹45,350 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 45 प्रतिशत अधिक है। यह बढ़ोतरी तब हुई है जब वैश्विक व्यापार बाधाएं, भू-राजनीतिक तनाव और मैक्रोइकॉनॉमिक चिंताएं बनी हुई थीं। हालांकि IPO की संख्या में गिरावट आई है। 2024 की पहली छमाही में 36 IPOs लॉन्च हुए थे, जबकि 2025 की पहली छमाही में यह संख्या घटकर 24 रह गई। इसका मतलब यह हुआ कि कंपनियां अब बड़े आकार के IPO लेकर आ रही हैं, जिससे कुल फंडरेजिंग में इजाफा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में औसत पब्लिक इश्यू की साइज बढ़ी है, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। मर्चेंट बैंकरों के अनुसार, इस अवधि में 24 कंपनियों ने कुल ₹45,351 करोड़ जुटाए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 36 कंपनियों ने ₹31,281 करोड़ जुटाए थे। JM Financial Institutional Securities की Managing Director, Neha Agarwal ने कहा कि वैश्विक व्यापार तनाव, भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद कंपनियां IPO के माध्यम से ₹45,000 करोड़ से अधिक राशि जुटाने में सफल रहीं
इस साल की शुरुआत में Sebi के पास ड्राफ्ट IPO फाइलिंग में भी तेज वृद्धि देखी गई, जिसमें जनवरी से जून तक कुल 118 कंपनियों ने प्रारंभिक दस्तावेज जमा किए, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या मात्र 52 थी। यह दर्शाता है कि आने वाले महीनों में IPO का बाजार और भी सक्रिय होने की संभावना है। JM Financial ने इस IPO सीजन में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 10 इश्यूज के माध्यम से ₹26,838 करोड़ जुटाए, जो Q1FY26 के लिए सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। IPO की लिस्टिंग पर औसतन 25 प्रतिशत का रिटर्न मिला, जो निवेशकों के लिए आकर्षक साबित हुआ। इस अवधि में कुछ बड़े IPOs ने खासा ध्यान खींचा। इनमें शामिल हैं HDB Financial Services का ₹12,500 करोड़ का इश्यू, Hexaware Technologies का ₹8,750 करोड़, Schloss Bangalore का ₹3,500 करोड़ और Ather Energy का ₹2,981 करोड़ का इश्यू। ज्यादातर IPOs में नई इक्विटी का इश्यू और मौजूदा शेयरधारकों द्वारा ऑफर फॉर सेल मिला-जुला था। जुटाए गए फंड का इस्तेमाल कंपनियों ने विस्तार योजनाओं, कर्ज़ चुकाने और वर्किंग कैपिटल की जरूरतों के लिए किया। बड़ी संख्या में कंपनियां मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे इंडस्ट्रियल सेक्टर्स से आई हैं, जो यह दर्शाता है कि निवेशकों की रुचि अभी भी आर्थिक आधार वाले सेक्टर्स में बनी हुई है। जुलाई में भी चार से अधिक IPO लॉन्च हो चुके हैं और कम से कम पांच अन्य पाइपलाइन में हैं, जो बाजार की निरंतर रफ्तार को दिखाता है
विश्लेषकों का कहना है कि 2025 की दूसरी छमाही में भी IPO मार्केट में सतर्क लेकिन सकारात्मक रुख देखने को मिलेगा। Choice Capital Advisors के CEO Ratiraj Tibrewal के अनुसार, आर्थिक हालात में सुधार होना तय है क्योंकि महंगाई, ब्याज दरें, भू-राजनीतिक तनाव और मुद्रा अस्थिरता जैसे कारकों में कमी आएगी। इससे घरेलू निवेशकों का भरोसा और निवेश बढ़ने की संभावना है। Geojit Financial Services के Head of Research Vinod Nair ने कहा कि यदि विदेशी संस्थागत और रिटेल निवेशकों का प्रवाह कम रहा तो यह साल-दर-साल आधार पर बाजार को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, Q1FY26 और Q2FY26 में आय में सुधार और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में प्रगति IPO बाजार के लिए अहम भूमिका निभाएगी। पिछले साल की दूसरी छमाही में ₹1.3 लाख करोड़ के भारी आधार को देखते हुए, इस साल का परफॉर्मेंस इसी स्तर तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कुल मिलाकर, 2025 की पहली छमाही ने IPO बाजार में नए रिकॉर्ड बनाए हैं और निवेशकों को लाभ भी दिया है। बड़ी कंपनियों के बड़े इश्यू और बढ़ती फाइलिंग यह संकेत देते हैं कि आने वाले महीनों में IPO का बाजार और सक्रिय रहेगा। निवेशक सतर्कता के साथ, बेहतर आर्थिक माहौल और सकारात्मक नीतियों के चलते इस सेक्टर में आगे भी अच्छी संभावनाएं देखने को मिल सकती हैं