HDFC Bank का मुनाफा थोड़ा गिरा, लेकिन Margin में बरकरार रहने की उम्मीद, Rate Cuts का असर धीरे-धीरे दिखेगा

Saurabh
By Saurabh

HDFC Bank ने हाल ही में अपनी Q1FY26 के नतीजे जारी किए हैं, जिनमें बैंक ने अपने margins को लेकर एक सकारात्मक रुख दिखाया है। बैंक का मानना है कि आने वाले कुछ क्वार्टरों में उसके margins स्थिर रहेंगे, भले ही हाल ही में हुए rate cuts का असर धीरे-धीरे सामने आए। बैंक प्रबंधन के अनुसार, फरवरी और अप्रैल में हुए repo rate cuts का प्रभाव पहले ही loan book में काफी हद तक दिख चुका है, लेकिन जून में 50 basis points की कटौती के प्रभाव को पूरी तरह से कमाई में दिखने में थोड़ा समय लगेगा। HDFC Bank ने अपने post-results analyst call में बताया कि उसके EBLR-linked loan book, जो कुल loans का लगभग 65 से 67 प्रतिशत हिस्सा है, को पूरी तरह से repricing में 1 से 3 महीने लगते हैं। इनमें से कुछ loans महीनेवार रीसेट होते हैं, जबकि बाकी तिमाही आधार पर। इसी कारण Q1 में yield on assets में sequential बढ़ोतरी लगभग 20 basis points तक सीमित रही, जबकि पिछले quarter में एक बार की आय को समायोजित किया गया। बैंक ने यह भी कहा कि जैसे-जैसे lower rates loan book और deposits में पूरी तरह से pass through होंगे, margins में धीरे-धीरे सुधार होने की उम्मीद है। यह सुधार मिड-टर्म deposits की अवधि 12-18 महीने होने के कारण भी संभव है। Q1FY26 में HDFC Bank का core net interest margin (NIM) 3.35 प्रतिशत पर आ गया, जो मार्च क्वार्टर के 3.46 प्रतिशत से थोड़ा कम है। यह गिरावट केंद्रीय बैंक के हाल के rate cuts के चलते अपेक्षित थी

बैंक ने इस दौरान Rs 16,258 करोड़ का consolidated net profit रिपोर्ट किया, जो पिछले साल की इसी अवधि में Rs 16,475 करोड़ था। खास बात यह रही कि बैंक ने अपनी सहायक कंपनी HDB Financial Services के IPO से एक बार की pre-tax आय Rs 9,128 करोड़ की प्राप्ति दर्ज की, लेकिन इसके बावजूद भी net profit में कमी आई। मुनाफे में कमी के पीछे मुख्य वजह बढ़ी हुई provisions हैं, जो इस quarter में Rs 14,442 करोड़ तक पहुंच गईं। इनमें से Rs 9,000 करोड़ floating provisions के लिए और Rs 1,700 करोड़ contingent buffers के लिए रखे गए हैं, जो संकेत देते हैं कि बैंक संभावित asset quality risks के प्रति सतर्क है। HDB Financial Services के IPO के बाद, HDFC Bank की उस सहायक कंपनी में हिस्सेदारी 94.32 प्रतिशत से घटकर 74.19 प्रतिशत हो गई है। वहीं, standalone basis पर बैंक का net interest income (NII) सालाना आधार पर 5.4 प्रतिशत बढ़कर Rs 31,438 करोड़ हो गया है। यह वृद्धि बैंक की lending activities और बेहतर interest income की वजह से आई है। बैंक के प्रबंधन ने यह भी बताया कि FY26 में branch expansion सामान्य स्तर पर लौट आएगा और FY27 तक margins में फिर से सुधार देखने को मिल सकता है। इस बीच, ICICI Bank जैसी अन्य private lenders ने भी monetary easing के कारण loan growth में बढ़ोतरी की संभावना जताई है, जो पूरे बैंकिंग सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत हैं। कुल मिलाकर, HDFC Bank ने इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में mixed परिणाम दिखाए हैं

जहां एक ओर rate cuts के कारण margins पर दबाव रहा, वहीं दूसरी ओर बेहतर प्रावधान नीति और cautious approach के चलते बैंक ने asset quality को मजबूत बनाए रखने की कोशिश की है। आने वाले कुछ महीनों में जैसे-जैसे repo rate cuts का पूरा प्रभाव loan book और deposits में दिखेगा, बैंक के margins में स्थिरता आने के साथ-साथ सुधार की उम्मीद है। यह स्थिति निवेशकों के लिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि बैंक की financial health और profitability सीधे तौर पर उसके margin management और asset quality पर निर्भर करती है। HDFC Bank की cautious प्रावधान नीति और steady margin outlook से यह संकेत मिलता है कि बैंक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भी मजबूती से आगे बढ़ने की योजना बना रहा है। इस तरह, HDFC Bank ने अपने Q1FY26 के नतीजों के जरिए यह स्पष्ट कर दिया है कि वह rate cuts के प्रभाव को समझदारी से मैनेज करते हुए अपनी profitability और asset quality दोनों को संतुलित बनाए रखने में सक्षम है। आने वाले समय में बैंक की performance और margin trends पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी

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