भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम ने एक बड़ा कदम बढ़ाया है। 17 जुलाई को Startup Policy Forum (SPF) ने Centre for New-age Public Companies (CNPC) की शुरुआत की है, जो टेक्नोलॉजी आधारित 50 से अधिक कंपनियों को IPO के बाद के जटिल दौर से पार पाने में मदद करेगा। यह पहल खास तौर पर उन कंपनियों के लिए है जो पहले से लिस्टेड हैं या जो लिस्टिंग की तैयारी कर रही हैं। CNPC का मकसद है कि स्टार्टअप्स को पब्लिक मार्केट में आने के बाद मिलने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए एक समग्र सपोर्ट सिस्टम देना। IPO के बाद कई स्टार्टअप्स को नियमों का पालन, गवर्नेंस, निवेशकों के साथ संवाद और मार्केट-रेडीनेस जैसे मुद्दों का सामना करना पड़ता है। CNPC इन्हीं जरूरतों को समझते हुए एक ऐसा मंच बना रहा है जो न केवल तकनीकी सहायता देगा बल्कि पियर मेन्टरिंग और ट्रेनिंग भी प्रदान करेगा। यह पहली बार होगा जब विकासशील कंपनियों का एक समूह सार्वजनिक कंपनियों के लिए एक संरचित सपोर्ट हब के रूप में काम करेगा। CNPC की एक महत्वपूर्ण भूमिका रेगुलेटरी बॉडी SEBI और स्टॉक एक्सचेंज के साथ मिलकर लिस्टिंग नियमों को सरल बनाना और ट्रांजिशन प्रोसेस को आसान करना भी है। इस पहल के माध्यम से ये कंपनियां अपनी समस्याओं को एक साथ रखकर समयबद्ध समाधान पा सकेंगी, जिससे IPO प्रक्रिया में देरी और अनिश्चितता कम होगी। यह महत्वाकांक्षी कदम उस समय आया है जब भारत के स्टार्टअप IPO पाइपलाइन में तेजी आई है
अगले तीन-चार वर्षों में 30 से अधिक स्टार्टअप्स, जिनका कुल मूल्य लगभग 100 अरब डॉलर आंका गया है, पब्लिक मार्केट में आने वाले हैं। 2024 में ही 13 स्टार्टअप्स ने सफलतापूर्वक लिस्टिंग की, जिनसे लगभग ₹30,000 करोड़ की पूंजी जुटाई गई। इस तरह भारत वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी लिस्टिंग के मामले में यूएस और चीन जैसे देशों से आगे निकलता दिख रहा है। IPO के प्रति संस्थागत निवेशकों की रुचि में इजाफा, यूनिकॉर्न कंपनियों की बढ़ती लाभप्रदता और SEBI के द्वारा किए गए सुधार IPO प्रक्रियाओं को आसान बना रहे हैं। इसके बावजूद, नई और लिस्टिंग के लिए तैयार कंपनियों को अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जैसे नियमों का पालन, निवेशकों का विश्वास बनाए रखना और मजबूत गवर्नेंस को स्थापित करना। CNPC इन सभी बिंदुओं पर काम करेगा ताकि स्टार्टअप्स का पब्लिक मार्केट में सफलतापूर्वक प्रवेश सुनिश्चित हो सके। Startup Policy Forum के सदस्यों का मानना है कि लिस्टिंग के लिए तैयार होना सिर्फ वित्तीय मापदंडों को पूरा करने तक सीमित नहीं है। बल्कि गवर्नेंस, निवेशकों के साथ संचार, आवश्यक खुलासे और कार्यप्रणाली के एकीकृत होने की भी आवश्यकता होती है। CNPC इन्हीं सभी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करेगा ताकि स्टार्टअप्स न केवल लिस्टिंग कर सकें, बल्कि पब्लिक कंपनी के रूप में मजबूती से खड़े रह सकें। इस पहल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह स्टार्टअप्स के लिए समय पर और व्यावहारिक सहायता प्रदान करता है
IPO के बाद का दौर अक्सर कंपनियों के लिए जटिल और चुनौतीपूर्ण होता है, जहां उन्हें लगातार नियमों का पालन करना होता है और निवेशकों की उम्मीदों पर खरा उतरना होता है। CNPC के माध्यम से ये कंपनियां बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगी और सार्वजनिक बाजार के दबाव को सफलतापूर्वक संभाल सकेंगी। भारत के स्टार्टअप्स के लिए यह एक नए युग की शुरुआत है। CNPC जैसी संरचित सहायता व्यवस्था से न केवल कंपनियों को IPO की राह आसान होगी, बल्कि यह उनकी दीर्घकालिक सफलता और स्थिरता का भी आधार बनेगा। जैसे-जैसे और कंपनियां आने वाले वर्षों में पब्लिक मार्केट में प्रवेश करेंगी, ऐसे सपोर्ट सिस्टम की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। CNPC की स्थापना एक संकेत है कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम अब केवल नवाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि वह वैश्विक पूंजी बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने और टिकाऊ विकास के लिए भी तैयार हो रहा है। यह पहल देश के पब्लिक मार्केट्स को और अधिक जीवंत और निवेशकों के लिए आकर्षक बनाएगी। इस प्रकार, Centre for New-age Public Companies न केवल IPO प्रक्रिया को आसान बनाएगा, बल्कि भारत के स्टार्टअप्स को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कैसे यह केंद्र भारत की तकनीकी कंपनियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होता है