Nifty 50 25,200 के नीचे फिसला, IT सेक्टर में कमजोरी से बाजार में घबराहट

Saurabh
By Saurabh

भारतीय शेयर बाजार में 17 जुलाई को कारोबार के अंतिम घंटे में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांक Nifty 50 ने 25,200 के महत्वपूर्ण स्तर को टूटते हुए नीचे कर दिया। इसी दौरान Sensex भी करीब 375 अंक या 0.45 प्रतिशत की गिरावट के साथ 82,259.24 पर बंद हुआ। वहीं, Nifty 50 में 100.60 अंक या 0.40 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई और यह 25,111.45 पर बंद हुआ। कुल मिलाकर इस दिन लगभग 1952 शेयर में तेजी रही, 1931 शेयर गिरावट पर रहे जबकि 142 शेयर स्थिर बंद हुए। बाजार के व्यापक हिस्से ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया, जिसमें Nifty Realty इंडेक्स 1.3 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद Nifty Metal और Nifty Pharma ने क्रमशः 0.7 प्रतिशत और 0.4 प्रतिशत की मामूली तेजी दिखाई। Nifty Energy और Nifty FMCG ने भी 0.3 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की, लेकिन IT सेक्टर में सबसे अधिक गिरावट आई। Nifty IT इंडेक्स 1.4 प्रतिशत लुढ़क गया, जिससे इस क्षेत्र के शेयरों में बिकवाली तेज हुई। इसके अतिरिक्त Nifty PSU Bank 0.7 प्रतिशत, Nifty Infra 0.3 प्रतिशत और Nifty Media 0.2 प्रतिशत नीचे आए। IT सेक्टर में कमजोरी का मुख्य कारण चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही की कमजोर कमाई रही, जिसने बाजार में मांग के दबाव को दर्शाया

इससे निवेशकों के मन में अविश्वास बढ़ा और उन्होंने अपने पोर्टफोलियो से IT शेयरों को बाहर निकालना शुरू कर दिया। वहीं, व्यापक बाजार सूचकांक की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में केवल मामूली गिरावट दर्ज हुई, Nifty Smallcap 100 और Nifty Midcap 100 दोनों ही 0.1 प्रतिशत नीचे बंद हुए। विश्लेषकों ने इस गिरावट को लेकर सतर्कता दिखाई है। Geojit Investments के Head of Research, Vinod Nair ने बताया कि Q1 के कमजोर रिज़ल्ट और US-India ट्रेड डील को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। उन्होंने कहा कि बड़े कैप शेयरों की ऊंची वैल्यूएशन और विदेशी निवेशकों के निकासी के कारण बाजार में रुझान कमजोर हुआ है। हालांकि, यदि US-India ट्रेड डील में सकारात्मक खबरें आती हैं तो इससे बाजार में तेजी आ सकती है। Citigroup Inc. के ब्रोकरेज डिवीजन ने भी भारतीय इक्विटी के रेटिंग को ‘overweight’ से घटाकर ‘neutral’ कर दिया है। वहीं, चीन और दक्षिण कोरिया के मार्केट को बेहतर आर्निंग आउटलुक और उचित वैल्यूएशन के कारण ‘overweight’ रेटिंग दी गई है। Citi के अनुसार, भारत की मैक्रो इकॉनमी अन्य देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है और US ट्रेड डील की संभावना बनी हुई है, लेकिन बाजार के EPS ग्रोथ आउटलुक अब पहले जैसा विशेष नहीं दिख रहा है। दूसरी ओर, Bank of America के सर्वे के मुताबिक, भारत अब एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में निवेश के लिए चौथे स्थान पर आ गया है

यह संकेत करता है कि फंड मैनेजरों की प्राथमिकता में बदलाव आया है और वे दूसरे क्षेत्रों की तरफ रुख कर रहे हैं। इस बीच, Nifty 50 लगभग दो महीने से एक कंसोलिडेशन फेज में फंसा हुआ है, जिससे बाजार में दिशा का पता लगाना मुश्किल हो रहा है। Kotak Securities के Head Equity Research, Shrikant Chouhan ने बताया कि 25,100 पर Nifty और 82,300 पर Sensex का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन होगा। यदि बाजार इस स्तर के ऊपर बना रहता है तो तेजी जारी रहने की संभावना है और बाजार 20-दिन के SMA या 25,350/83,200 के स्तर तक उछाल सकता है। इसके बाद 25,500/83,800 तक की बढ़त भी संभव है। लेकिन यदि बाजार 25,100/82,300 से नीचे गिरता है तो ट्रेंड में बदलाव आ सकता है और यह 50-दिन के SMA या 25,000-24,900/82,000-81,700 के स्तर तक फिसल सकता है। इस प्रकार, भारतीय शेयर बाजार में फिलहाल अस्थिरता बनी हुई है, जहां कमजोर Q1 कमाई, वैश्विक अस्थिरता और विदेशी निवेशकों के रवैये ने बाजार को दबाव में रखा है। निवेशकों को अभी सतर्क रहना होगा और बाजार के तकनीकी स्तरों पर नजर बनाए रखनी होगी ताकि सही समय पर निर्णय लिया जा सके। आज के कारोबार में कुल मिलाकर बिकवाली के दबाव के बावजूद कुछ सेक्टर्स में मजबूती नजर आई, लेकिन IT और PSU Bank जैसे अहम सेक्टर्स में कमजोरी ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। आने वाले दिनों में अमेरिकी और भारतीय आर्थिक नीतियों, वैश्विक बाजार की स्थिति, और Q2 की कमाई के परिणाम बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे

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