“क्या Indian Markets में छुपा है बड़ा Earnings बूम? जानिए Julius Baer के Nitin Raheja की सच्चाई!”

Saurabh
By Saurabh

Julius Baer के Executive Director और Head Discretionary Equities Business, Nitin Raheja ने हाल ही में बाजार की वर्तमान स्थिति और आने वाले समय में संभावित ट्रेंड्स पर अपनी गहन राय साझा की है। उनका मानना है कि वर्तमान बाजार पूरी तरह से tariffs के जोखिमों को समझकर प्राइस नहीं कर रहा है। खासकर भारत के संदर्भ में, वे कहते हैं कि tariffs से ज्यादा अहम भूमिका कंपनी के earnings की होगी और यह देखना होगा कि इन earnings ग्रोथ को कितनी हद तक स्टॉक्स में पहले से शामिल किया गया है। Nitin Raheja का यह भी कहना है कि साल के दूसरे हाफ में त्योहारों के दौरान खपत में वृद्धि बाजार के लिए एक बड़ा ट्रिगर साबित होगी। त्योहारों के सीजन में अगर कंजम्प्शन में तेजी आती है तो इससे कंपनियों की बिक्री और मुनाफे में सुधार होगा, जो बाजार की सेहत के लिए सकारात्मक संकेत होगा। टैरिफ पॉलिसी को लेकर बाजार में लगातार बदलाव और जटिलताएं बनी हुई हैं, जिससे निवेशक कन्फ्यूज हैं। हालांकि, Nitin Raheja ने इस पर एक दिलचस्प बात कही है कि बाजार में “TACO – Trump Always Chickens Out” जैसी मानसिकता विकसित हो चुकी है। इसका मतलब है कि निवेशक अब टैरिफ की धमकियों को गंभीरता से नहीं लेते, पर उनका मानना है कि यह जोखिम अभी भी पूरी तरह से बाजार में प्राइस नहीं हुए हैं। बाजार को टैरिफ के नकारात्मक प्रभावों को समझने में अभी और वक्त लगेगा। उनका मानना है कि IT सेक्टर और ऑटो सेक्टर के 2-व्हीलर सेक्शन में अभी भी earnings डाऊनग्रेड का खतरा मौजूद है

ये दोनों सेक्टर अभी भी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, खासकर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच। वहीं दूसरी ओर, cement और rural consumption वाले सेक्टर Q1 FY26 और पूरे FY26 में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं और इनसे सकारात्मक सरप्राइज की उम्मीद है। क्या FY26 की दूसरी छमाही में earnings ग्रोथ के अनुमान में तेजी आ सकती है? Nitin Raheja का कहना है कि फिलहाल जो 12-13% की ग्रोथ की उम्मीद की जा रही है, उसे पार करना मुश्किल नजर आता है। लेकिन RBI की हालिया नीतियों जैसे कि interest rate कटौती को आगे बढ़ाना और सिस्टम में liquidity बढ़ाना, साथ ही बजट में टैक्स थ्रेशोल्ड लिमिट को बढ़ाने के फैसले के प्रभाव कुछ क्वार्टर के बाद दिख सकते हैं। ये कदम घरेलू खपत को बढ़ावा देंगे और आर्थिक गतिविधियों में जान डालेंगे। विशेष रूप से cement सेक्टर को वे FY26 में earnings ग्रोथ में नेतृत्व करने वाला मानते हैं। इस क्षेत्र में मांग की मजबूती और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के कारण यह सेक्टर बेहतर परफॉर्म कर सकता है। ग्रामीण उपभोग में सुधार के साथ-साथ बुनियादी ढांचे से जुड़ी जरूरतों में वृद्धि भी cement सेक्टर की मजबूती का कारण बनेगी। Nitin Raheja ने de-dollarization के विचार को भी समर्थन दिया है। उनका कहना है कि अगर ऐसा होता है तो यह भारत के लिए लंबी अवधि में लाभकारी होगा

डॉलर के कमजोर होने से भारत जैसे देश को फायदा होगा क्योंकि भारत मुख्य रूप से तेल का आयात करता है। डॉलर की कमजोरी से आयात महंगा नहीं होगा, जिससे महंगाई कम रहने की संभावना है। कम महंगाई से ब्याज दरों में कमी बनी रहेगी और इससे खपत को बढ़ावा मिलेगा। सारांश में, Nitin Raheja का दृष्टिकोण यह है कि भारतीय बाजारों में आने वाले महीनों में earnings और त्योहारों की खपत सबसे बड़े ट्रिगर रहेंगे। हालांकि टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताएं बनी हुई हैं, पर बाजार उनमें पूरी तरह से विश्वास नहीं कर रहा है। IT और 2-व्हीलर सेक्टर में जोखिम तो हैं, लेकिन cement और ग्रामीण खपत वाले सेक्टरों से उम्मीदें जगी हैं। RBI की नीतिगत राहत और बजट के उपाय भविष्य में आर्थिक गतिविधि में तेजी लाने में मददगार साबित हो सकते हैं। इस प्रकार, निवेशकों के लिए यह समय सतर्क रहने का है, लेकिन अवसर भी कम नहीं हैं। बाजार की दिशा earnings और उपभोक्ता मांग के आधार पर तय होगी, और आने वाला त्योहारों का सीजन इसे और स्पष्ट कर सकता है

Share This Article
By Saurabh
Follow:
Hello friends, my name is Saurabh Sharma. I am a digital content creator. I really enjoy writing blogs and creating code. My goal is to provide readers with simple, pure, and quick information related to finance and the stock market in Hindi.
Leave a comment
Would you like to receive notifications on latest updates? No Yes