भारतीय शेयर बाजारों में शुक्रवार, 12 जुलाई 2025 को भारी गिरावट देखने को मिली, जहां प्रमुख IT Stocks में बिकवाली का दबाव बना रहा। Tata Consultancy Services (TCS) के Q1 FY26 के कमजोर नतीजों ने निवेशकों के मनोबल को गिरा दिया और इस वजह से बाजार में तेजी से बिकवाली आई। इसके अलावा, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की देरी, वैश्विक तनावों में वृद्धि और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी निवेशकों की चिंताएं बढ़ाईं और बाजार को कमजोर किया। बीएसई Sensex 689.81 अंकों की गिरावट के साथ 82,500.47 पर बंद हुआ, जबकि Nifty50 में 0.81% की गिरावट आई और यह 25,149.85 पर बंद हुआ, जो इसके महत्वपूर्ण 20-दिन के मूविंग एवरेज (20-DMA) 25,245 से नीचे आ गया। IT सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। खासतौर पर बड़े कैप टेक कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली हुई। TCS के शेयर 3.47% गिरकर बंद हुए, जबकि कंपनी ने Q1 में ₹12,760 करोड़ का नेट प्रॉफिट बताया, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 6% अधिक था। हालांकि, इसका रिवेन्यू ग्रोथ बहुत कमजोर रहा। रुपया रिवेन्यू सिर्फ 1.3% बढ़ा और कॉन्सटेंट करेंसी में यह 3% से अधिक गिर गया। इसका मुख्य कारण BSNL के साथ चल रहे कॉन्ट्रैक्ट का समाप्त होना और मैक्रोइकोनॉमिक चुनौतियां थीं
Accenture के शेयर भी 3.16% नीचे आए, जबकि Nifty IT इंडेक्स 1.78% गिर गया और इसके सभी दस स्टॉक्स लाल निशान में बंद हुए। TCS के अलावा Wipro, Infosys, LTIMindtree और Tech Mahindra के शेयर भी सुबह के कारोबार में 1% से 2% तक नीचे आए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जहां बड़े आईटी खिलाड़ी दबाव में हैं, वहीं मिड-कैप IT कंपनियों के लिए निकट भविष्य में बेहतर प्रदर्शन की संभावना बनी हुई है, क्योंकि उनकी ग्रोथ पोटेंशियल और वैल्यूएशंस बेहतर हैं। बाजार की कमजोरी के पीछे अन्य प्रमुख कारण भी हैं। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में देरी से निवेशक सतर्क हो गए हैं। वाणिज्य मंत्रालय की टीम जल्द ही वाशिंगटन जाकर बातचीत करेगी, लेकिन अमेरिका ने भारतीय सामानों पर अतिरिक्त टैरिफ की निलंबन अवधि 1 अगस्त 2025 तक बढ़ा दी है, जो बाजार में अनिश्चितता बनाए रखे हुए है। इसके अलावा, वैश्विक व्यापार तनाव भी बढ़ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कनाडा से आयातित सामानों पर 35% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया है, जिससे वैश्विक व्यापार में और बाधाएं आ सकती हैं। इन घटनाओं ने निवेशकों के मन में वैश्विक व्यापार की स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी ने बाजार को प्रभावित किया
11 जुलाई को Brent crude futures की कीमत $68.88 प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो 0.39% की बढ़ोतरी है। रूस पर नए प्रतिबंधों की आशंका ने तेल के दामों को बढ़ाया है, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए महंगाई की आशंका बढ़ गई है। इसके साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के बारे में भी अटकलें तेज हैं। Trump ने Fed से ब्याज दरों में तीन प्रतिशत अंक की कटौती करने का दबाव डाला है, जिससे Fed की स्वतंत्रता पर सवाल उठे हैं और वैश्विक निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी है। भारत VIX, जो बाजार के डर का सूचकांक है, 2% बढ़कर 11.87 पर पहुंच गया है। यह संकेत देता है कि निवेशकों में अस्थिरता और अनिश्चितता दोनों बढ़ रही हैं, खासकर इस कमाई के मौसम और वैश्विक घटनाओं के बीच। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर दबाव भारतीय बाजारों को प्रभावित कर रहे हैं। TCS के कमज़ोर नतीजों ने IT सेक्टर में बिकवाली को बढ़ावा दिया, जबकि बढ़ते तेल दाम, व्यापार समझौते की अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता को और गहरा किया है। विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल बाजार में सतर्कता बरतनी चाहिए और मजबूत कमाई वाले उच्च गुणवत्ता वाले कंपनियों पर ध्यान देना बेहतर होगा। Nifty IT इंडेक्स पर दबाव तब तक बना रह सकता है जब तक कि मैक्रोइकोनॉमिक कारकों को लेकर स्पष्टता नहीं आती
कुल मिलाकर, इस समय भारतीय शेयर बाजार में वैश्विक और घरेलू कई चुनौतियां सामने हैं, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं